MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 6 प्राकृतिक आपदाएँ एवं आपदा प्रबन्धन

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 6 प्राकृतिक आपदाएँ एवं आपदा प्रबन्धन

 

MP Board Class 10th Social Science Chapter 6 पाठान्त अभ्यास

 

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Social Science Chapter 6 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

सही विकल्प चुनिए 

( 1 ) सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित राज्य 

( i ) बिहार 

( ii ) पश्चिमी बंगाल 

( iii ) असम 

( iv ) उत्तरप्रदेश । 

 

( 2 ) भूकम्प की दृष्टि से भारत का अत्यधिक प्रभावित क्षेत्र 

( i ) कच्छ 

( ii ) अरावली पर्वत 

( iii ) उड़ीसा 

( iv ) गोवा । 

 

( 3 ) दिसम्बर 2004 में सुनामी से सबसे अधिक जनहानि हुई थी 

( i ) तमिलनाडु में 

( ii ) गुजरात में 

( iii ) केरल में 

( iv ) उड़ीसा में

 

( 4 ) विश्व स्तर पर पहला भू शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ था 

( i ) जापान ( याकोहामा ) 

( ii ) भारत ( बैंगलुरू ) 

( iii ) ब्राजील ( रियोडिजेनिरो ) 

( iv ) USA ( न्यूयॉर्क ) 

 

उत्तर- (1) (i) , (2) (i) , (3) (ii) , (4) (iii)

 

प्राकृतिक आपदाएँ एवं आपदा प्रबन्धन अतिलघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. भूस्खलन को रोकने के लिए पहाड़ी सड़कों के किनारे क्या किया जाता है ? 

उत्तर- भूस्खलन को रोकने के लिए पहाड़ी सड़कों के किनारे पुख्ता दीवारें बनाई जाती है । 

 

प्रश्न 2. अचानक उत्पन्न होने वाली प्राकृतिक आपदाएँ कौन – कौन सी हैं ? 

उत्तर- भूकम्प , सुनामी लहरें , ज्वालामुखी विस्फोट , भूस्खलन , बाढ़ , चक्रवात , हिमस्खलन आदि 

 

प्रश्न 3. तटबंध का निर्माण किन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त माना जाता है ? 

उत्तर- बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में , उन क्षेत्रों में तटबंध का निर्माण उपयुक्त माना जाता है । 

 

प्रश्न 4. रिक्टर पैमाने पर क्या मापा जाता है ?

उत्तर- भूकम्प की तीव्रता को मापा जाता है । 

 

प्राकृतिक आपदाएँ एवं आपदा प्रबन्धन लघुउत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. आपदाओंसे क्या तात्पर्य है ?

उत्तर- आपदा एक मानव जनित अथवा प्राकृतिक विपत्ति है , जिससे निश्चित क्षेत्र में आजीविका तथा सम्पत्ति की हानि होती है , जिसकी परिणति मानवीय वेदना तथा कष्टों में होती है । 

 

प्रश्न 2. सूखा एवं बाढ़ किसे कहते हैं ? लिखिए ।

उत्तर- किसी भी क्षेत्र में होने वाली सामान्य वर्षा में 25 % या उससे अधिक कमी होने पर उसे सूखे की स्थिति कहा जाता है तथा 50 % से अधिक कमी होने पर गम्भीर सूखे की स्थिति होती है । बाढ़- किसी बड़े भू – भाग में किसी भी कारण से जल भराव होना , जिससे जन धन की अपार क्षति हो , ‘ बाढ़ ‘ कहलाता है । बाढ़ जलाशयों में पानी की वृद्धि , तेज हवाओं , बाँधों के टूटने आदि से आती है । 

 

प्रश्न 3. भूस्खलन की आपदा से बचने के लिए प्रयुक्त तीन चरणों को लिखिए । 

उत्तर- 

( 1 ) सर्वप्रथम आपदा संकट मानचित्रण करके भूस्खलन के क्षेत्रों का पता लगाना चाहिए । ऐसा करने से यह पता लग सकेगा कि बस्तियाँ बसाने के लिए कौन – कौन से क्षेत्रों से बचा जाए । 

( 2 ) अधिक भूस्खलन सम्भावित क्षेत्रों में बड़े निर्माण कार्य तथा विकास कार्य नहीं किए जाने चाहिए । 

( 3 ) पहाड़ी ढालों पर प्राकृतिक वनस्पति को बढ़ावा दिया जाना चाहिए । वनस्पतिविहीन ऊपरी ढालों पर उपयुक्त प्रजातियों के वृक्षों को रोपित करके पुनः वनस्पति युक्त बनाया जाना चाहिए । 

 

प्रश्न 4. सुनामी से क्या आशय है ? 

उत्तर- भूकम्प और ज्वालामुखी से महासागरीय धरातल में अचानक हलचल पैदा होती है और महासागरीय जल का अचानक विस्थापन होता है । परिणामस्वरूप समुद्री जल में उर्ध्वाधर ऊँची तरंगें पैदा होती हैं , जिन्हें ‘ सुनामी ‘ कहा जाता है । 

 

प्रश्न 5. हिमालय और भारत के उतर पूर्वी छेत्र में अधिक भूकम्प क्यों आते हैं ?

उत्तर – पूर्वी क्षेत्र में अधिक भूकम्प क्यों आते हैं ? उत्तर – हिमालय और भारत के उत्तर – पूर्वी क्षेत्र में भूकम्प इसलिए अधिक आते हैं , क्योंकि वहाँ की नदियों , हिमक्षेत्र तथा अत्यधिक वर्षा वाले स्थानों के कारण भू – सतह की हलचल तीव्र हो जाती है shal की भूगर्भीय शैलें इन हलचलों के प्रभाव से हट जाती है व भूकम्प आते हैं । 

 

प्रश्न 6. पश्चिमी और मध्य भारत में सूखे ज्यादा क्यों पड़ते हैं ? 

उत्तर – पश्चिमी और मध्य भारत में भू – जल स्तर कम है तथा वहाँ के जल स्रोतों की जल संग्रहण क्षमता कम है , साथ ही वन क्षेत्रों की कमी के कारण इन क्षेत्रों में वर्षा का स्तर न्यून है । इसलिए इन क्षेत्रों में सूखे ज्यादा पड़ते हैं । 

 

प्रश्न 7. भारत में सुनामी प्रभावित प्रमुख क्षेत्र कौन – से हैं ? 

उत्तर – भारत में सुनामी प्रभावित क्षेत्र- चैन्नई के तटीय क्षेत्र , अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह , पांडिचेरी , तमिलनाडू के तटीय क्षेत्र , इंदिरा पाईन्ट आदि हैं ।

 

प्रश्न 8. प्राकृतिक आपदाओं के लिए वनों का विदोहन उत्तरदायी है । क्या यह सच है ? समझाइए ।

उत्तर- हाँ , प्राकृतिक आपदाओं के लिए वनों का विदोहन भी कुछ हद तक उत्तरदायी है । वनों के विदोहन से वर्षा प्रभावित होती है व सूखे की स्थिति निर्मित हो जाती है । अतः सूखे जैसी प्राकृतिक आपदा वनों के विनाश के कारण उत्पन्न होती है । इसी प्रकार वनों के विकास से वर्षा का जल प्रवाह तेज हो जाता है , जिससे बाढ़ आती है । अतः बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा भी वन विदोहन का परिणाम होती है । अतः यह कहा जा सकता है कि ” प्राकृतिक आपदाओं के लिए वनों का विदोहन उत्तरदायी है । ” 

 

प्रश्न 9. महामारी कैसे फैलती है ? स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर- महामारी के प्रमुख कारण विषाणु , जीवाणु , प्रोटोजोआ अथवा कवक होते हैं । ये विषाक्त जीवाणु आदि खाद्य पदार्थ एवं पेयजल के संदूषण , बारिश के मौसम में मच्छरों की वृद्धि आदि से उत्पन्न होते हैं और महामारी फैलती है । चूंकि महामारी का संक्रमण तीव्र गति से होता है , अतः यह वायु द्वारा , रोग संवाहकों द्वारा तेजी से फैलती है । 

 

प्रश्न 10. आपदा प्रबन्धन से क्या आशय है ? आपदा प्रबन्धन के मुख्य तत्व बताइए ।

उत्तर- आपदा प्रबन्धन क्रियाकलापों की वह श्रृंखला है , जो आपदा से पहले और उसके बाद ही नहीं , बल्कि एक दूसरे के समानान्तर भी चलती रहती है । इसका प्रमुख उद्देश्य आपदा की रोकथाम तथा आपदा के दुष्प्रभाव को कम करना होता है । आपदा प्रबन्धन के मुख्य तत्व हैं- 

( 1 ) पहले से तैयारी । 

( 2 ) जवाबी कार्यवाही । 

( 3 ) सामान्य जीवन स्तर पर लौटना और पुनर्वास । 

( 4 ) रोकथाम और दुष्प्रभाव को कम करने के लिए योजना । 

 

प्रश्न 11. आपदा प्रबंधन का ज्ञान प्रत्येक विद्यार्थी को होना चाहिए क्यों ? 

उत्तर- आपदा प्रबंधनन का ज्ञान प्रत्येक विद्यार्थी को होना चाहिए क्योंकि इसके ज्ञान से विद्यार्थी आपदा के समय स्वयं की सुरक्षा तो करता ही है , समय आने पर दूसरों की सहायता करके धन – जन की हानि को रोकने में भी सक्षम होता है । 

 

प्राकृतिक आपदाएँ एवं आपदा प्रबन्धन दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. बाढ आपदा के लिए उत्तरदायी कारकों का वर्णन करते हुए उसके नियन्त्रण के उपाय बताइए । 

उत्तर- 

( 1 ) तटबन्ध टूटने , बाँध टूटने और बराज से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण बाढ़ आती है । अविवेक पूर्ण तरीके से तट बन्धों का निर्माण होने , पुराने व जीर्ण हो रहे बाँधों के कारण बाढ़ आती है । 

( 2 ) हिमालय क्षेत्र में बहने वाली नदियों में मिट्टी और गाद पानी के साथ घुलकर बहकर मैदानों एवं समुद्र तटीय क्षेत्रों में जमा हो जाती है । इससे नदियों का तल उठ जाता है और उनकी जल धारा ही बाढ़ का रूप धारण कर लेती है । 

( 3 ) पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन द्वारा नदी का मार्ग अवरुद्ध होने से जलाशय बन जाते हैं और फिर उनके अचानक टूटने से प्रलयकारी बा आती हैं । 

( 4 ) पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण , वन कटाई , अनियन्त्रित खनन से पहाड़ों की भूमि अस्थिर हो गई है , जिससे बाढ़ आने की संभावना बढ़ जाती है । 

 

बाढ आपदा नियन्त्रण के निम्नलिखित उपाय हैं-

 

( 1 ) नदियों के ऊपरी क्षेत्रों में अनेक जलाशय बनाये जाने चाहिए । 

( 2 ) सहायक नदियों व धाराओं पर अनेक छोटे – छोटे बाँध बनाए जाने चाहिए , जिससे मुख्य नदी में बाढ़ के खतरे को कम किया जा सके । 

( 3 ) नदियों के ऊपरी जल संग्रहण क्षेत्रों में सघन वृक्षारोपण किया जाना चाहिए । 

( 4 ) मैदानी क्षेत्रों में अनुपयुक्त भूमि में जल संग्रहण किया जाना चाहिए । 

( 5 ) तट बन्धों की सुरक्षा की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए । 

( 6 ) तटबन्धों के बीच फंसे हुए गाँवों की सुरक्षा के लिए पूर्ण अथवा आंशिक पुनर्वास किया जाना चाहिए । 

( 7 ) नदियों के किनारों की भूमि पर मानवीय बस्तियों के अतिक्रमण पर रोक लगाई जानी चाहिए ।

( 8 ) नदियों के जल ग्रहण क्षेत्रों में वन विनाश पर नियन्त्रण किया जाना चाहिए । 

( 9 ) पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण के समय विस्फोटकों का सीमित उपयोग कर भूस्खलन पर नियन्त्रण किया जाना चाहिए । 

 

प्रश्न 2. भूकम्प आपदा का अर्थ बताते हुए भारत में भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों का वर्णन कीजिए । 

उत्तर- भूकम्प आपदा- भूकम्प एक ऐसा संकट है , जो अचानक प्रभावित करता है । भूकम्प किसी भी समय , अचानक बिना किसी चेतावनी के आता है । भूकम्प वह घटना है , जिसके द्वारा भूपटल में हलचल पैदा होती है तथा कम्पन होता है । यह कम्पन तरंग के रूप में होता है । जैसे – जैसे ये तरंगें केन्द्र से दूर जाती हैं , उनकी शक्ति एवं तीव्रता का ह्रास होता है । भूकम्प का प्रभाव दो रूपों में होता है । प्रथम प्रभाव उत्पत्ति केन्द्र के चारों तरफ तरंगों के द्वारा प्रसारित होता है यह क्षैतिज प्रभाव होता है । दूसरा प्रभाव धरातलीय भागों ऊपर तथा नीचे की तरफ लम्बवत् रूप से होता है । भूकम्प का यह रूप अत्यन्त विनाशकारी होता है । जहाँ से भूकम्प की शुरूआत होती है , उस स्थान को भूकम्प का केन्द्र कहते हैं । 

 

धरातल पर सर्वप्रथम भूकम्प लहरों एवं हलचलों का अनुभव होता है । भूकम्प केन्द्र से जो लहरें प्रसारित होती हैं , उन्हें भूकम्प लहरें कहते हैं । भूकम्प की तीव्रता और परिमाण का मापन रियेक्टर पैमाने पर किया जाता है । ऐसा समझा जाता है कि पृथ्वी की सतह बड़ी – बड़ी प्लेटो से बनी हैं । ये प्लेटें पृथ्वी की आंतरिक गर्मी के कारण एक – दूसरे की तरफ खिसकती हैं । इनके खिसकने अथवा फैलने से भूकम्प आता है । भारत में भूकम्प प्रभावित क्षेत्र – देश में सबसे अधिक भूकम्प प्रभावित क्षेत्र हैं- हिमालय , जिसके अंतर्गत हिमाचल प्रदेश , उत्तराखंड , उत्तर बिहार तथा पूर्वोत्तर भारत शामिल हैं । इसके अतिरिक्त कच्छ एवं कोकण तट भी अधिक खतरा प्रभावित क्षेत्र हैं । मध्यभारत , राजस्थान , महाराष्ट्र , कर्नाटक , उड़ीसा , तमिलनाडु , आंध्रप्रदेश , झारखंड तथा छत्तीसगढ़ भूकम्प से कम प्रभावित क्षेत्र है । देश के अन्य भाग मध्यम खतरनाक क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं । 

 

प्रश्न 3. सूखा और बाद में क्या सामान्य है ? किस प्रकार उचित योजना के द्वारा सूखे और बाढ़ की स्थितियों को नियन्त्रित किया जा सकता है ? विवेचना कीजिए । 

उत्तर- सूखा और बाढ़ में सूखा सामान्य है , क्योंकि सूखे की स्थिति में कोई संरचनात्मक क्षति नहीं होती है । सूखा पड़ने पर फसल का न होना एक सामान्य घटनाक्रम है , जबकि बाढ़ से बहुत क्षति होती है । बाढ़ के कारण जन व धन दोनों की हानि होती है व जीवन स्थिति असामान्य हो जाती है । अतः बाढ़ व सूखे में सूखे की स्थिति सामान्य है । 

 

सूखे की स्थिति को नियन्त्रित करने हेतु उपाय- 

 

( 1 ) सूखे की स्थिति पर निगाह रखी जानी चाहिए । निगाह रखने का आशय है कि वर्षा की स्थिति जलाशयों , झीलों , नदियों में पानी की उपलब्धता पर दृष्टि रखना और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में पानी की मौजूदा माँग के साथ तुलना करना तथा जल संग्रहण को बढ़ावा देना चाहिए । 

( 2 ) जल आपूर्ति बढ़ाने और घरों तथा किसानों के खेतों में वर्षा के पानी को संग्रह करने से उपलब्ध पानी की मात्रा बढ़ जाती है । सभी खेतों में बह रहे जल को एक स्थान पर इकट्ठा किया जाना चाहिए । जहाँ पर पानी गिरता है , उसे मिट्टी में रिसने दिया जाए । 

( 3 ) सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना चाहिए , जिससे सूखे से असुरक्षा को कम किया जा सके । 

( 4 ) आजीविका आयोजना के अंतर्गत सूखे के प्रभाव को कम करने के लिए खेती से हटकर रोजगार के अवसर बढ़ाना चाहिए । 

 

बाढ़ की स्थिति नियन्त्रित करने हेतु उपाय- 

 

( 1 ) नदियों के ऊपरी क्षेत्रों में जलाशयों का निर्माण किया जाना चाहिए । 

( 2 ) नदियों के ऊपरी जल संग्रहण क्षेत्रों में सघन वृक्षारोपण किया जाना चाहिए । 

( 3 ) मैदानों में अनुपयुक्त भूमि में जल संग्रहण करना चाहिए । 

( 4 ) तटबन्धों की सुरक्षा की ओर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए । 

( 5 ) वनों का विकास करना चाहिए एवं वनों के विनाश पर नियन्त्रण करना चाहिए । 

 

प्रश्न 4. सामान्य आपदाओं से क्या तात्पर्य है ? प्रमुख सामान्य आपदाओं का वर्गीकरण करते हुए उनके कारण , प्रभाव और बचाव के उपार्यों को स्पष्ट कीजिए । 

उत्तर- सामान्य आपदाओं से तात्पर्य उन आपदाओं से है , जो मानव जीवन में सामान्यतः मानव की लापरवाही के कारण उत्पन्न होती है । जैसे- आग लगना , सड़क दुर्घटना होना आदि । 

 

प्रमुख सामान्य आपदाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. आग लगना- 

आग लगने के कई कारण होते हैं बिजली के हीटर , खाना पकाते समय होने वाली दुर्घटनाएं , बिजली की वाइरिंग क्षमता से अधिक भार , कमजोर वाइरिंग , कूड़ा – कर्कट में लगी आग , आगजनी , बारूदी पदार्थ आदि । आग लगने से जन व धन दोनों की हानि होती है । 

 

आग से बचाव के उपाय- 

( 1 ) आग से बचाव के बुनियादी नियम और बाहर जाने का रास्ता सदैव ध्यान रखना चाहिए । 

( 2 ) घर के भीतर अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ नहीं रखना चाहिए । 

( 3 ) घर में एक अग्निशमन यंत्र अवश्य चाहिए । घर के प्रत्येक सदस्य को इसके इस्तेमाल का तरीका आना चाहिए । 

( 4 ) जब घर से बाहर जाएँ तो बिजली और गैस के सभी उपकरण बन्द करके जाना चाहिए । 

( 5 ) बिजली के एक ही सॉकेट में बहुत सारे उपकरण नहीं लगाना चाहिए । 

( 6 ) आग लगने पर दमकल विभाग को बुलाएँ । उन्हें अपना पता तथा आग की प्रकृति और स्थान की सूचना देना चाहिए । 

 

  1. सड़क दुर्घटनाएँ – 

सड़क व्यवस्था बेहतर सम्पर्क और सेवा के लिए बनाई जाती है , लेकिन वाहन चालकों जल्दबाजी व लापरवाहियों के कारण सड़क दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ती जा रही हैं । इसके प्रमुख कारण ये हैं- 

( अ ) यातायात नियमों का उल्लंघन । 

( ब ) तेज गति से गाड़ी चलाना । 

( स ) शराब पीकर गाड़ी चलाना 

( द ) वाहनों तथा सड़कों के रखरखाव में कमी । 

 

सड़क दुर्घटना से बचाव के उपाय- 

( 1 ) वाहन तभी चलाएँ , जब आप उसके लिए पर्याप्त सक्षम हों । 

( 2 ) सड़क पर सुरक्षित रहने का सबसे बढ़िया तरीका है , अपनी लेन में चलने के नियम का पालन करें । 

( 3 ) सड़क संकेतों की जानकारी रखें तथा उनका पालन करें । 

( 4 ) बारिश के मौसम में वाहन चलाने में सावधानी रखें । 

( 5 ) वाहन चलाते समय गति को अचानक तेज या कम न करें । 

( 6 ) अपने वाहन निर्माता द्वारा बताई गई गति पर वाहन चलाएँ । 

( 7 ) सड़क पार करते समय सड़क के दोनों तरफ देखें । 

 

  1. रेल दुर्घटनाएँ – 

रेल दुर्घटनाएँ रखरखाव की कमी , मानवीय त्रुटि अथवा तोड़ – फोड़ की कार्यवाही के कारण पटरी से उतरने से होती है । रेल दुर्घटनाओं से सुरक्षा के उपाय इस प्रकार हैं- 

( 1 ) रेल्वे क्रासिंग पर सिग्नल और स्विंग बैरियर का ध्यान रखें । उनके नीचे से निकलकर क्रासिंग को पार करने की कोशिश न करें । 

( 2 ) यदि क्रासिंग पर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं है , तो पटरी पार करने से पूर्व वाहन से उतरकर पटरी के दोनों तरफ दृष्टि डालें । 

( 3 ) ज्वलनशील सामग्री लेकर न चलें । रेलगाड़ी में बीड़ी , सिगरेट नहीं पीना चाहिए । 

( 4 ) रेलगाड़ी में सफर करते समय दरवाजे पर न खड़े हों और न ही बाहर की तरफ झुकें । 

( 5 ) आपातकालीन खिड़की का दुर्घटना के समय बाहर निकलने हेतु उपयोग करें । आपातकालीन चेन को बिना जरूरत के न खींचें । 

 

प्रश्न 5. रासायनिक आपदाएँ क्या हैं ? प्रमुख रासायनिक आपदाओं के उदाहरण देते हुए रोकथाम के उपाय बताइए । 

उत्तर- प्रौद्योगिकी के बढ़ते कदमों ने रसायनों के प्रयोग पर बल दिया है । रसायनों के प्रभाव से उत्पन्न जहरीली गैसों के रिसाव से होने वाली आपदाएँ रासायनिक आपदाएँ कहलाती हैं । 

 

उदाहरण के लिए- ( 2-3 दिसम्बर , 1984 ) भोपाल में घटने वाली अभी तक की सबसे विनाशकारी औद्योगिक – रासायनिक आपदा है । यह त्रासदी एक प्रौद्योगिकी घटना का परिणाम थी । इसमें हाइड्रोजन , साइनाइड तथा अन्य अभिकृत उत्पादों सहित 45 टन मिथाइल आइसो साइनाइट ( एमआईसी ) नामक अत्यन्त जहरीली गैस यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक कारखाने से रात लगभग 12 बजे रिसी और हवा के साथ बह गई । सरकारी आंकड़ों के अनुसार इससे लगभग 3600 लोग मरे और अनेक रोगग्रस्त हो गए । 

 

रासायनिक आपदाओं की रोकथाम हेतु निम्नलिखित उपाय हैं- 

( 1 ) खतरनाक रसायनों के उपयोग , भंडारण तथा बचाव के तरीके से सम्बन्धित जानकारी साल भाषा में नागरिकों तक पहुँचाना चाहिए । 

( 2 ) रिहायशी क्षेत्रों को औद्योगिक क्षेत्रों से अलग एवं दूर रखा जाना चाहिए । औद्योगिक व आवासीय क्षेत्रों के मध्य हरित पट्टी होना चाहिए । 

( 3 ) दुर्घटना की स्थिति का मुकाबला करने की समझ . विकसित करने हेतु समय – समय पर नकली अभ्यास कराना चाहिए । 

( 4 ) अग्निरोधी चेतावनी प्रणाली मे सुधार करना चाहिए । 

( 5 ) जहरीले पदार्थों के भंडारण की क्षमता सीमित ही रखी जाए । 

( 6 ) उद्योगों के लिए बीमा और सुरक्षा सम्बन्धी कानून सख्ती से लागू होना चाहिए । 

 

प्रश्न 6. भारत के रेखा मानचित्र पर अपने रहने की स्थिति को बिन्दु के द्वारा दर्शाइए एवम् उसमें भूकम्प प्रभावित मुख्य क्षेत्र , सूखा , बाढ़ , भूस्खलन एवं सुनामी सम्भावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित संभावित क्षेत्रों को दर्शाइए ?

प्रश्न 7. भूकम्प क्यों आते हैं ? भारत के भूकम्प प्रभावित क्षेत्र लिखिए । 

उत्तर- भूकम्प आपदा- भूकम्प एक ऐसा संकट है , जो अचानक प्रभावित करता है । भूकम्प किसी भी समय , अचानक बिना किसी चेतावनी के आता है । भूकम्प वह घटना है , जिसके द्वारा भूपटल में हलचल पैदा होती है तथा कम्पन होता है । यह कम्पन तरंग के रूप में होता है । जैसे – जैसे ये तरंगें केन्द्र से दूर जाती हैं , उनकी शक्ति एवं तीव्रता का ह्रास होता है । भूकम्प का प्रभाव दो रूपों में होता है । प्रथम प्रभाव उत्पत्ति केन्द्र के चारों तरफ तरंगों के द्वारा प्रसारित होता है यह क्षैतिज प्रभाव होता है । दूसरा प्रभाव धरातलीय भागों ऊपर तथा नीचे की तरफ लम्बवत् रूप से होता है । भूकम्प का यह रूप अत्यन्त विनाशकारी होता है । जहाँ से भूकम्प की शुरूआत होती है , उस स्थान को भूकम्प का केन्द्र कहते हैं । 

 

धरातल पर सर्वप्रथम भूकम्प लहरों एवं हलचलों का अनुभव होता है । भूकम्प केन्द्र से जो लहरें प्रसारित होती हैं , उन्हें भूकम्प लहरें कहते हैं । भूकम्प की तीव्रता और परिमाण का मापन रियेक्टर पैमाने पर किया जाता है । ऐसा समझा जाता है कि पृथ्वी की सतह बड़ी – बड़ी प्लेटो से बनी हैं । ये प्लेटें पृथ्वी की आंतरिक गर्मी के कारण एक – दूसरे की तरफ खिसकती हैं । इनके खिसकने अथवा फैलने से भूकम्प आता है । भारत में भूकम्प प्रभावित क्षेत्र – देश में सबसे अधिक भूकम्प प्रभावित क्षेत्र हैं- हिमालय , जिसके अंतर्गत हिमाचल प्रदेश , उत्तराखंड , उत्तर बिहार तथा पूर्वोत्तर भारत शामिल हैं । इसके अतिरिक्त कच्छ एवं कोकण तट भी अधिक खतरा प्रभावित क्षेत्र हैं । मध्यभारत , राजस्थान , महाराष्ट्र , कर्नाटक , उड़ीसा , तमिलनाडु , आंध्रप्रदेश , झारखंड तथा छत्तीसगढ़ भूकम्प से कम प्रभावित क्षेत्र है । देश के अन्य भाग मध्यम खतरनाक क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं ।

 

प्रश्न 8. घरों में लगने वाली आग से बचाव के कोई चार उपाय बताइए ।

उत्तर – आग से बचाव के उपाय- 

( 1 ) आग से बचाव के बुनियादी नियम और बाहर जाने का रास्ता सदैव ध्यान में रखना चाहिए । 

( 2 ) घर के भीतर अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ नहीं रखना चाहिए । 

( 3 ) घर में एक अग्निशमन यंत्र अवश्य चाहिए और घर के प्रत्येक सदस्य को इसके इस्तेमाल का तरीका आना चाहिए 

( 4 ) जब घर से बाहर जाएँ तो बिजली और गैस के सभी उपकरण बंद करके जाना चाहिए ।

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