MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 7 1857 का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम

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MP Board Class 10th Social Science Solutions Chapter 7 1857 का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम

 

MP Board Class 10th Social Science Chapter 7 पाठान्त अभ्यास

 

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Social Science Chapter 7 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

सही विकल्प चुनिए 

 

( 1 ) 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम में बुन्देलखण्ड से प्रमुख सेनानी थे 

( 1 ) कुंवर सिंह 

( ii ) बख्तावर सिंह 

( i ) तात्या टोपे 

( iv ) अहमदुल्ला खाँ । 

 

( 2 ) 1857 के संग्राम के समय भारत के गवर्नर जनरल थे 

( ) डलहौजी 

( ii ) बैटिंग 

( iii ) कैनिंग 

( iv ) रिपन । 

 

उत्तर- ( 1 ) ( iii ) , ( 2 ) ( iii ) 

 

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए 

 

( 1 ) बहादुर शाह द्वितीय को बन्दी बनाकर … स्थान पर भेज दिया गया । 

( 2 ) लार्ड डलहौजी ने … के कारण अनेक राज्यों को अंग्रेजी राज्य में शामिल कर लिया ।

( 3 ) ब्रिटिश संसद के 1858 के अधिनियम के अनुसार भारत पर शासन करने का अधिकार … को दिया । 

( 4 ) दिल्ली की जनता ने … को भारत का सम्राट घोषित किया ।

( 5 ) अंग्रेज इतिहासकारों ने 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम को … कहना स्वीकार किया । 

 

उत्तर- ( 1 ) रंगून , ( 2 ) हड़प नीति , ( 3 ) इंग्लैण्ड की सरकार , ( 4 ) बहादुरशाह द्वितीय , ( 5 ) सैनिक 

 

सही जोड़ी मिलान कीजिए 

सत्य असत्य को स्पष्ट कीजिए 

 

( i ) 1857 के संग्राम में स्वतंत्रता की भावनाओं का बीजारोपण किया । 

( ii ) दिल्ली की जनता ने बहादुरशाह द्वितीय को भारत का सम्राट घोषित किया । 

उत्तर- 

( i ) सत्य

( ii ) सत्य

 

एक शब्द में उत्तर दीजिए

 

( i ) ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना किस सन् में हुई थी ? 

( ii ) 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं के नाम बताइए । 

( iii ) अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांति का नेतृत्व मौलवी हमीदुल्ला ने कहाँ से किया ? 

( iv ) असहयोग आंदोलन किस वर्ष में प्रारंभ हुआ था ? 

( v ) 1857 के संग्राम को ‘ सैनिक विद्रोह ‘ की संज्ञा किसने दी ? 

( vi ) बहादुरशाह द्वितीय को बंदी बनाकर किस स्थान पर भेजा गया था ? 

उत्तर – 

( i ) 1600 ई . 

( ii ) 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई , बहादुरशाह जफ़र द्वितीय , तात्या टोपे , नाना साहेब , बेगम हजरत महल , कुंवर सिंह आदि प्रमुख नेता थे 

( iii ) बरेली 

( iv ) 1920 में

( vi ) डलहौजी

( vi ) रंगून ( बर्मा )

 

1857 का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम अति लघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. क्षेत्रों के नाम लिखिए जहाँ 1857 ई . का स्वतन्त्रता संग्राम व्यापक रूप से हुआ

उत्तर- अवध , कानपुर , रूहेलखण्ड , अलीगढ़ , मथुरा , आगरा , बिहार , ग्वालियर , कोटा आदि क्षेत्रों में 1857 ई . का स्वतन्त्रता संग्राम व्यापक रूप से हुआ । 

 

प्रश्न 2. 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं के नाम बताइए । 

उत्तर- 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई , बहादुरशाह जफ़र द्वितीय , तात्या टोपे , नाना साहेब , बेगम हजरत महल , कुंवर सिंह आदि प्रमुख नेता थे । 

 

प्रश्न 3. 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम का तात्कालिक कारण क्या था ? ‘

उत्तर- 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम का तात्कालिक कारण ‘ चर्बी वाले कारतूसों की घटना ‘ था । 

 

प्रश्न 4. लार्ड डलहौजी की हड़प नीति क्या थी ?

उत्तर- इसे विलय नीति भी कहा जाता है । लार्ड डलहौजी द्वारा कम्पनी के अधीन देशी राज्यों के संतानहीन शासकों को गोद लेने के अधिकार से वंचित कर उनके राज्य को हड़प लेना ही हड़प नीति थी । 

 

1857 का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम लघु उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. 1857 के संग्राम को प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम क्यों कहा जाता है ? 

उत्तर- 1857 के संग्राम को प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम इसलिए कहा जाता है , क्योंकि यह स्वतंत्रता संग्राम भारत के इतिहास की एक गरिमामय युगान्तकारी घटना है । 1857 की क्रांति भारत की पहली सशस्त्र क्रांति थी , जिसकी व्यापकता और शक्ति के सामने ब्रिटिश शासन की नींव डगमगा उठी थी । राष्ट्रीय समस्याओं को केन्द्र में रखकर 1857 की क्रांति ने भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी के शासन के अस्तित्व को चुनौती दी । सम्पूर्ण देश में 1857 की क्रांति संगठित रूप से अंग्रेजी शासन की समाप्ति के लिए प्रथम सशस्त्र संघर्ष था । 

 

प्रश्न 2. 1857 के पूर्व ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह अपनी आरंभिक अवस्था में क्यों असफल रहे ? 

उत्तर -1857 के पूर्व ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह अपनी आरंभिक अवस्था में इसलिए असफल हो गये , क्योंकि वे विद्रोह क्षेत्रीय विद्रोह के रूप में थे । ये विद्रोह असंगठित रूप में किये गये थे व इसके उद्देश्य भी संकुचित थे । इन विद्रोहों में एकता व कुशल नेतृत्व का अभाव था । 

 

प्रश्न 3. अंग्रेजी शासन से भारतीय शासकों में असन्तोष के क्या कारण थे ?

उत्तर- अंग्रेजों की राज्य विस्तार की नीति भारतीय शासकों में असंतोष का प्रमुख कारण थी । लार्ड वेलेजली की सहायक संधि व्यवस्था और लार्ड डलहौजी की हड़प नीति के कारण अनेक राज्यों को अंग्रेजी साम्राज्य में जबरदस्ती विलय कर दिया गया व शासकों से अनादरपूर्ण व्यवहार किया गया । इससे भारतीय शासकों की भावनाओं को ठेस पहुँची व उनमें असंतोष व्याप्त हो गया । 

 

प्रश्न 4. प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम का शासन व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा ? 

उत्तर- प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम का शासन व्यवस्था पर बहुत प्रभाव पड़ा । इस संग्राम से अंग्रेजी साम्राज्य की जड़ें हिल गईं । अंग्रेजी साम्राज्य की सैनिक शक्ति व आर्थिक व्यवस्था चरमरा गई । अतः ब्रिटिश संसद ने 1858 ई . में एक अधिनियम पारित कर भारत पर शासन का अधिकार ईस्ट इंडिया कम्पनी से लेकर इंग्लैण्ड की सरकार को सौंप दिया व सेना का पुनर्गठन किया । 

 

प्रश्न 5. 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम के असफलता के कारण बताइए । 

उत्तर- 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम की असफलता के निम्नलिखित कारण थे 

  1. संगठन और एकता का अभाव- 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के असफल रहने के पीछे संगम और एकता का अभाव प्रमुख रूप से उत्तरदायी रहा । इस क्रान्ति की न तो कोई सुनियोजित योजना ही तैयार की गई और न ही कोई ठोस कार्यक्रम था । इसी कारण यह सीमित और असंगठित बन कर रह गया । 
  2. नेतृत्व का अभाव- 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में सशक्त और रणनीति बनाने में योग्य नेतृत्व का अभाव असफलता का एक बड़ा कारण था । इस आंदोलन को किसी एक व्यक्ति ने नेतृत्व नहीं दिया , जिस कारण से यह आंदोलन अपने उद्देश्य में पूर्णतः सफल नहीं हो सका । 
  3. परम्परावादी हथियार – प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम में भारतीय सैनिकों के पास आधुनिक हथियार नहीं थे , जबकि अंग्रेज सैनिक पूर्णतः आधुनिक हथियार व गोला – बारूद का उपयोग कर रहे थे । भारतीय सैनिक अपने परम्परावादी हथियार – तलवार , तीर – कमान , भाले – बरछे आदि के सहारे ही युद्ध के मैदान में कूद पड़े थे , जो उनकी पराजय का कारण बना । 
  4. सामन्तवादी स्वरूप -1857 के संग्राम में एक ओर अवध , रूहेलखण्ड आदि उत्तरी भारत के सामन्तों ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया तो दूसरी ओर पटियाला , जींद , ग्वालियर व हैदराबाद के शासकों । विद्रोह के उन्मूलन में अंग्रेजी हुकूमत को सहयोग किया । इस तरह यह स्वतन्त्रता संग्राम अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सका । 
  5. बहादुरशाह द्वितीय की अनभिज्ञता- क्रान्तिकारियों द्वारा बहादुरशाह द्वितीय को अपना नेता घोषित करने के बावजूद भी बहादुरशाह के लिए यह क्रान्ति उतनी ही आकस्मिक थी , जितनी कि अंग्रेजों के लिए थी । यही कारण था कि बहादुरशाह को अंततः लेफ्टीनेण्ट हडसन ने बंदी बना कर रंगून भेज दिया । 
  6. समय से पूर्व और सूचना प्रसार असफल क्रान्ति -1857 की क्रान्ति की असफलता का एक बड़ा कारण यह भी था कि यह क्रान्ति समय से पूर्व ही प्रारम्भ हो गयी । यदि यह क्रान्ति एक निर्धारित कार्यक्रम के तहत लड़ी जाती , तो इसकी सफलता के अवसर ज्यादा होते । इसी तरह आंदोलन के प्रसार – प्रचार में भी क्रांतिकारी नेतृत्व असफल रहा । इसका असर 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम पर गहराई से पड़ा । 

 

1857 का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

 

प्रश्न 1. ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए समाज सुधार के कार्यों से भारतीय क्यों असंतुष्ट हुए ? 

उत्तर- ब्रिटिश सरकार द्वारा उठाए गए समाज सुधार के कार्यों से भारतीय इसलिए असंतुष्ट हो गये , क्योंकि उन्हें लगा कि ब्रिटिश सरकार उनके सामाजिक जीवन में हस्तक्षेप कर रही है । भारतीयों के मन में यह भय उत्पन्न हो गया कि ब्रिटिश सरकार उनके सामाजिक तथा धार्मिक रीति – रिवाजों को नष्ट करना चाहती है । अतः उनमें असंतोष की भावना जागृत हो गयी । लार्ड मैकाले की शिक्षा नीति भारतीय शिक्षा पद्धति एवं संस्कृति पर आक्रमण था । अतः भारतीयों को लगा कि अंग्रेजी शिक्षा नीति उनकी सभ्यता , भाषा , परम्परा एवं संस्कृति पर आक्रमण है । अतः वे विरोध करने लगे । इसके अतिरिक्त ब्रिटिश सरकार द्वारा ईसाई धर्म का प्रचार , धर्म परिवर्तन हेतु प्रलोभन , शिक्षण संस्थाओं में ईसाई धर्म की शिक्षा आदि अनेक कारण थे , जिनके कारण भारतीय असंतुष्ट हुए । 

 

प्रश्न 2. 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम का भारतीय इतिहास में क्या महत्व है ? लिखिए ।

उत्तर -1857 के स्वतन्त्रता संग्राम का भारतीय इतिहास में बहुत महत्व है । 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम में यद्यपि पराजय का सामना करना पड़ा , तथापि इस क्रान्ति के बड़े गहरे व दूरगामी परिणाम सामने आये , जो भारतीय स्वतन्त्रता आंदोलन के इतिहास में भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने । क्रान्ति ने अंग्रेजी साम्राज्य की जड़ों को हिला दिया था । 1857 ई . का संग्राम ब्रिटिश राज के लिए एक बड़ी चुनौती था । इसे अन्ततः कुचल दिया गया , परन्तु इस संग्राम से अंग्रेजों को गहरा झटका लगा । इस संग्राम ने अंग्रेजी साम्राज्य की जड़ों को हिला कर रख दिया था । अतः ब्रिटिश सरकार ने भारत में अनेक प्रशासनिक परिवर्तन किये । इन परिवर्तनों के कारण भारतीय समाज , अर्थव्यवस्था और सरकार में निम्नलिखित महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए :-

 

( 1 ) ब्रिटिश संसद ने 1858 ई . में एक अधिनियम पारित किया । इसके अनुसार भारत पर शासन करने का अधिकार ईस्ट इंडिया कम्पनी से लेकर सीधे इंग्लैण्ड की सरकार ने ले लिया । 

( 2 ) 1858 के पश्चात् सेना का पुनर्गठन किया गया । अंग्रेजों का भारतीय सैनिकों पर से विश्वास उठ गया था , अतः महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां अंग्रेज अधिकारियों को सौंपी गयीं । इसके अतिरिक्त यूरोपीय सैनिकों की संख्या में वृद्धि की गयी । अंग्रेजों ने ‘ फूट डालो और राज करो ‘ की नीति का पालन करते हुए भारतीय सेनाओं का संगठन किया । 

( 3 ) ब्रिटिश शासन ने देशी रियासतों का विलय करने की नीति में परिवर्तन किया और उत्तराधिकारियों को गोद लेने के अधिकार को मान्यता प्रदान की । देशी रियासत के शासकों को यह भी आश्वासने दिया गया कि अब किसी रियासत का विलय नहीं किया जाएगा । 

( 4 ) ब्रिटिश सरकार ने राजाओं , भू – स्वामियों और जमींदारों के प्रति उदार दृष्टिकोण अपनाया और इस प्रकार उनका समर्थन प्राप्त करने की नीति अपनायी । 

( 5 ) 1857 के संग्राम को ब्रिटिश इतिहासकारों ने ‘ सैनिक विद्रोह ‘ की संज्ञा देकर उसके महत्व को कम आँका । प्रसिद्ध क्रान्तिकारी और विचारक विनायक दामोदर सावरकर ने 1857 की घटनाओं को ‘ भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम ‘ कहा तथा अपनी पुस्तक का शीर्षक भी यही दिया है । 

 

प्रश्न 3. टिप्पणी लिखिए 

( क ) तात्या टोपे 

( ख ) रानी लक्ष्मीबाई 

( ग ) नाना साहब

( घ ) हजरत महल । 

उत्तर- 

( क ) तात्या टोपे- 

तात्या टोपे , 1857 के उन वीर सेनानियों में से एक थे , जिसकी आरम्भिक निष्ठा पेशवा परिवार के प्रति थी । तात्या टोपे अपनी देशभक्ति , वीरता , व्यूह रचना , शत्रु को चकमा देने की कुशलता , साधनहीनता की स्थिति में युद्ध जारी रखने का साहस , निर्भीकता और गुरिल्ला पद्धति से युद्ध के लिए जाने जाते हैं । पेशवा नाना साहेब की ओर से युद्ध का समस्त उत्तरदायित्व उनके स्वामिभक्त तात्या टोपे पर ही था । झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ ग्वालियर पर अधिकार करने में तात्या टोपे का बड़ा योगदान रहा । रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु के पश्चात् तात्या ने निरन्तर गुरिल्ला युद्ध के माध्यम से मध्यभारत और बुन्देलखण्ड में अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी । अंग्रेजों ने तात्या टोपे को बन्दी बनाने के लिए कुटिलता और विश्वासघात की नीति का पालन किया । अंततः तात्या टोपे को आरौन ( जिला गुना ) के जंगल में विश्राम करते समय बन्दी बनाया गया । अंग्रेजों ने 18 अप्रैल , 1859 को तात्या टोपे को शिवपुरी में फाँसी दी । 

 

( ख ) रानी लक्ष्मीबाई- 

अंग्रेजों ने 1854 में झाँसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु के पश्चात् उनकी रानी लक्ष्मीबाई के दत्तक पुत्र को झाँसी की गद्दी का उत्तराधिकारी मानने से इंकार कर दिया तथा झाँसी को अंग्रेजी साम्राज्य में विलय कर लिया । इसका विरोध करते हुए रानी लक्ष्मीबाई ने ब्रिटिश सेना से भयंकर टक्कर ली । सर ह्यूरोज द्वारा पराजित होने पर वह कालपी आयीं व तात्या टोपे की मदद से ग्वालियर पर अधिकार किया । अंग्रेज सेनापति यूरोज ने ग्वालियर आकर किले को घेर लिया । 17 जून , 1858 को झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई बड़ी वीरता से सैनिक वेश में संघर्ष करते हुई वीरगति को प्राप्त हुई । उनकी वीरता की गाथाएँ आज भी देशवासियों को प्रेरित करती हैं । 

 

( ग ) नाना साहेब- 

नाना साहेब , संग्राम के अन्य महत्वपूर्ण नेता थे । नाना साहेब भूतपूर्व पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र थे और बिठूर में निवास करते थे । पेशवा की मृत्यु के उपरान्त लार्ड डलहौजी ने नाना साहेब को पेंशन एवं उपाधि देने से वंचित कर दिया था । अतः नाना ने अपने स्वामिभक्त सैनिकों की मदद से अंग्रेजों को कानपुर से निकाल दिया और स्वयं को पेशवा घोषित कर दिया । तात्या टोपे और अजीमुल्लाह नाना साहेब के स्वामिभक्त सेनानायक थे । 

 

( घ ) बेगम हजरत महल – 

बेगम हज़रत महल अवध के नवाब की विधवा थी । संग्राम आरम्भ होने पर 4 जून , 1857 को अवध की बेगम ने संग्राम को प्रोत्साहन दिया और उसका संचालन किया । उसने अपने युवा पुत्र बिराजिस कादर को अवध का नवाब घोषित कर दिया तथा लखनऊ स्थित : ब्रिटिश रेजीडेन्सी पर आक्रमण किया । बेगम हजरत महल ने शाहजहाँपुर में भी संग्राम का नेतृत्व किया । पराजित होने के पश्चात् बेगम सुरक्षा की दृष्टि से नेपाल चली गयीं । 

 

प्रश्न 4. सन् 1857 की क्रांति के क्या परिणाम हुए ? 

उत्तर- 

( 1 ) भारत का शासन ग्लैण्ड की सरकार ने अपने हाथ में ले लिया । कम्पनी के शासन की समाप्ति । 

( 2 ) सेना में भारतीयों की संख्या कम करके यूरोपियन सैनिकों की संख्या बढ़ा दी गई , अब सेना में उच्च पद पर केवल अंग्रेज ही रखे गये थे । 

( 3 ) ब्रिटिश मंत्रिमण्डल में भारतीय मंत्री की नियुक्ति की गई । 

( 4 ) भारतीयों को बिना भेदभाव के नौकरियाँ देने का वचन दिया गया तथा महारानी – विक्टोरिया के घोषणा पत्र को दिल्ली के दरबार में पढ़ा गया जिसमें भारतीय नरेश और जनता को आश्वासन दिया गया था । 

( 5 ) देशी राज्यों को हड़पने की नीति का अंत कर दिया गया तथा देशी नरेश को वचन दिया गया कि अब उनके राज्य को अंग्रेजी राज्य में नहीं मिलाया जाएगा । 

 

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न 

 

प्रश्न 1. सन् 1857 की क्रांति के राजनीतिक कारण को समझाइए । 

उत्तर- अंग्रजों की राज्य विस्तार की नीति के कारण भारत के अनेक शासकों और जमींदारें । असन्तोष व्याप्त हो गया था । लार्ड वैलेजली की सहायक संधि व्यवस्था और लार्ड डलहौजी की हड़प नीति के कारण अनेक राज्यों को अंग्रेजी साम्राज्य जबरदस्ती विलय कर दिया गया । अंग्रेजों ने पंजाब , सिक्किम , सतारा , जैतपुर , सम्भलपुर , झाँसी , नागपुर आदि राज्यों को अपने अधीन कर लिया था । सरकार ने अवध , तंजौर , कर्नाटक के नवाबों की राजकीय उपाधियाँ समाप्त कर राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न कर दी । अंतिम मुगल सम्राटों के प्रति अंग्रेजों का व्यवहार अनादरपूर्ण होता चला गया । इन परिस्थितियों में शासक परिवारों में घबराहट फैल गयी थी । अंग्रेजों ने जिन राज्यों पर कब्जा किया वहाँ के सैनिक , कारीगर तथा अन्य व्यवसायों से जुड़े लोग भी प्रभावित हुए । अंग्रेजों ने अनेक सरदारों और जमींदारों से उनकी जमीन छीन ली । इसके कारण इन जमींदारियों में कार्यरत व्यक्ति बेरोजगार हो गये । इससे 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम की भूमिका बनी । 

 

प्रश्न 2. किन युद्धों ने भारत में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के मार्ग खोले ? अंग्रेजों ने किस प्रकार साम्राज्य विस्तार किया ? 

उत्तर- 1757 के प्लासी के युद्ध में ईस्ट इंडिया कम्पनी ने बंगाल के नवाब को पराजित किया और 1764 के बक्सर के युद्ध में कम्पनी ने अवध – बंगाल और मुगल सम्राट की संयुक्त शक्ति को पराजित किया । अंग्रेजों की इन विजयों ने भारत में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना का मार्ग खोल दिया । धीरे – धीरे कम्पनी ने उन सभी भारतीय शक्तियों की चुनौती को समाप्त करना आरम्भ किया जो कम्पनी के एकाधिकार के मार्ग में बाधा बन सकती थीं । बंगाल में वर्चस्व स्थापित करने के बाद कम्पनी ने मैसूर , मराठा , सिंध एवं पंजाब में सिक्खों की चुनौती को ध्वस्त किया । भारतीय राज्यों पर विजय प्राप्त करने के बाद कम्पनी ने अपने साम्राज्य का विस्तार करने के लिए पड़ोसी देशों की ओर ध्यान दिया । शीघ्र ही कम्पनी ने नेपाल , बर्मा , अफगानिस्तान , तिब्बत , सिक्किम , भूटान के साथ संघर्ष कर अपने साम्राज्य का विस्तार किया । 

 

प्रश्न 3. टिप्पणी लिखिए- 

( अ ) मंगल पाण्डे 

( ब ) बहादुर शाह जफर ( द्वितीय ) 

उत्तर- 

( अ ) मंगल पाण्डे- 

मंगल पाण्डे एक सैनिक था , जो बैरकपुर ( बंगाल ) स्थित छावनी में पदस्थ था । 29 मार्च , 1857 को इस सैनिक ने चर्बी मिले कारतूसों को मुँह से काटने से स्पष्ट मना कर दिया व क्रोध में आकर अपने अधिकारियों की हत्या कर दी । फलस्वरूप उसे बन्दी बना लिया गया और 8 अप्रैल , 1857 को फांसी दे दी गयी । 

 

( ब ) बहादुरशाह ज़फर ( द्वितीय ) – 

बहादुरशाह ज़फर द्वितीय मुगल सम्राज्य के अंतिम बादशाह थे । 10 मई , 1857 ई . को मेरठ की सैन्य छावनी के सिपाहियों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संग्राम आरम्भ कर दिल्ली जीत कर सत्ता के नए प्रतीक के रूप में वृद्ध बहादुरशाह द्वितीय को भारत का सम्राट घोषित कर दिया । वृद्धावस्था के बावजूद बहादुरशाह ज़फर ( द्वितीय ) ने क्रान्ति का नेतृत्व इसलिए स्वीकार किया , क्योंकि क्रान्तिकारियों में व्याप्त देश भक्ति की भावना ने उनमें भी आशा का संचार किया था । उन्होंने क्रान्ति को व्यापक रूप देने के लिए पटियाला , ग्वालियर , काश्मीर आदि रियासत के शासकों और राजपूताना के राजाओं को व्यक्तिगत पत्र लिखकर संग्राम में भाग लेने को कहा । दिल्ली के समाचारों के कारण क्रान्ति का विस्तार अनेक स्थानों पर हुआ । इससे घबराकर लार्ड कैनिंग ने दिल्ली से ही क्रांति दमन का निश्चय किया । बहादुरशाह ज़फर ( द्वितीय ) की सेनाएँ अंग्रेजी फौजों से वीरतापूर्वक लड़ी परन्तु पराजित हुयीं । अंग्रेजों ने बहादुरशाह ज़फर को बन्दी बना लिया । उन्हें निर्वासित कर रंगून ( बर्मा ) भेज दिया गया । जहाँ 1862 ई . में बहादुरशाह द्वितीय का निधन हो गया । 

 

प्रश्न 4. 1857 की क्रांति के मुख्य कारणों का उल्लेख कीजिए । 

उत्तर- भारत में अंग्रेजों के शोषण के विरूद्ध 1857 ई . में क्रांति हुई , जिसने अंग्रेजी राज्य की जड़ें हिला दी । इस क्रांति के तात्कालिक कारण निम्नलिखित थे –

 

  1. आर्थिक शोषण – 

अंग्रेजों के भारत में आने से भारतीयों की दशा खराब हो गई थी । किसानों पर अधिक कर लगा दिये , जिससे उनकी कमर ही जैसे टूट गई । औद्योगिक नीति से देश के दस्तकार बेकार हो गए । इंग्लैण्ड का माल भारत में बड़ी मात्रा में बिकने के लिए पूरी तरह प्रोत्साहित किया गया । पीड़ित किसान व दस्तकार बेकार हो गए । वे इंग्लैण्ड के खिलाफ आंदोलन करने व उनकी जड़ें उखाड़कर फेंकने के लिए संघर्ष में कूद पड़े । सारा व्यापार भी अंग्रेजों ने अपने हाथों में ले लिया , जिससे जन – असंतोष बढ़ गया , जो अंग्रेजों के विरुद्ध स्वाभाविक था । 

 

  1. राजनीतिक कारण- 

राजनीतिक भ्रष्टाचार व दूषित कानून भी जन – असंतोष का एक कारण था । सभी प्रशासनिक स्तरों पर जन – असंतोष था । पुलिस , छोटे अधिकारी वर्ग व न्यायालय में खुलेआम घूस चलती थी । इसके अतिरिक्त भारतीय शासकों में भी असंतोष था । पंजाब , अवध तथा सिंध को उन्होंने हथिया लिया और जब अंग्रेजों ने झाँसी व दिल्ली पर भी अपना अधिकार कर लिया , तो देशी राजाओं ने सोच लिया कि अब तो उनका अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा । न्याय में पक्षपात होता था । भारतीयों को ब्रिटिश प्रशासन में जानबूझ कर ऊँचे पदों से दूर रखा जाता था । नौकरी में भी हिन्दू लोगों को वेतन कम देते थे , जबकि अंग्रेजों को अधिक देते थे । 

 

  1. सामाजिक कारण – 

अंग्रेज भारतीयों को निम्न लोग समझकर उनसे घृणा करते थे । वे भारतीयों को कायर तथा काला सूअर कहते थे । रेल के डिब्बों में वे भारतीयों के साथ यात्रा करना पसंद नहीं करते थे । इसके अलावा अंग्रेजों ने सामाजिक सुधार हेतु कानून बनाये , जैसे- सती – प्रथा को कानूनी अपराध बताया गया तथा विधवा पुनर्विवाह को कानूनी अनुमति दी । अंग्रेजों के इन कार्यों को भारतीय रूढ़िवादियों ने शक की दृष्टि से देखा । शिक्षा व भाषा से भी भारतीय असंतुष्ट थे । 

 

  1. सैनिक कारण- 

ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने अपने साम्राज्य विस्तार के लिए एक विशाल सेना बनाई । उन्होंने अपनी सेना में भारतीयों को भी भर्ती किया , लेकिन भारतीय सैनिकों को कोई सम्मान नहीं दिया जाता था । 1857 ई . के विद्रोह के अन्य सैनिक कारण जैसे भारतीय सैनिकों को अंग्रेज घृणा की दृष्टि से देखते थे , कम्पनी के ऊँचे पदों पर केवल यूरोपियन को ही लिया जाता था भारतीय सैनिकों को वेतन कम मिलता था तथा लार्ड डलहौजी ने अनेक देशी रियासतों को अंग्रेजी राज्य में मिला दिया , जैसे- अवध और वहाँ की सैनिक पलटनें तोड़ दी । इस कारण बहुत सैनिक असंतुष्ट थे । सैनिक काफी तादाद में बेकार हो गये । अपमानजनक वातावरण में भारतीयों का अंग्रेजों के विरुद्ध होना स्वाभाविक था 

 

प्रश्न 5. प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की असफलता के कोई पाँच कारण लिखिए । 

उत्तर – प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम की असफलता के पाँच कारण-

 

  1. समय से पूर्व –

1857 की क्रांति निर्धारित तिथि से पूर्व प्रारंभ कर दी गई थी जिससे यह असफल हो गई । यदि यह क्रांति एक निर्धारित कार्यक्रम के तहत लड़ी जाती तो इसे सफलता अवश्य मिलती । रणनीति बनाने में योग्य 

 

  1. नेतृत्व का अभाव- 

1857 के प्रथम स्वतन्त्रता आंदोलन में सशक्त नेतृत्व का अभाव असफलता का एक बड़ा कारण था । इस आंदोलन को किसी एक व्यक्ति ने नेतृत्व नहीं दिया जिस कारण से यह आंदोलन अपने उद्देश्य में पूर्णतः सफल न हो सका । 

 

  1. संगठन और एकता का अभाव- 

1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के असफल रहने के पीछे संगठन और एकता का अभाव प्रमुख रूप से उत्तरदायी रहा । इस कांति की न तो कोई सुनियोजित योजना ही तैयार की गई न ही कोई ठोस कार्यक्रम था । इसी कारण यह सीमित और असंगठित बनकर रह गया । 

 

  1. परम्परावादी हथियार- 

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भारतीयों के पास आधुनिक हथियार नहीं थे जबकि अंग्रेजी सैनिक पूर्णतः आधुनिक हथियारों से लैस थे ।

 

प्रश्न 6. सहायक संधि व्यवस्था क्या थी ? इसको किसने लागू किया था ? 

उत्तर – भारत के गवर्नर जनरल वेलेजली द्वारा लागू व्यवस्था को सहायक सन्धि व्यवस्था कहा जाता है । इस व्यवस्था को जो भारतीय नरेश स्वीकार करते थे , उन्हें अंग्रेजों के संरक्षण में रहकर कार्य करना पड़ता था ।

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