MP Board Class 10th Special Hindi सहायक वाचन Solutions Chapter 2 तेरे घर पहिले होता विश्व सबेरा

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MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions Chapter 2 तेरे घर पहिले होता विश्व सबेरा (कविता, माखनलाल चतुर्वेदी)

तेरे घर पहिले होता विश्व सबेरा अभ्यास

 

प्रश्न 1.

‘नक्षत्रों पर बैठे पूर्वज माप रहे उत्कर्ष ‘ का आशय स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर – 

कवि ने भारतवर्ष को संघर्ष के लिए ललकारा है और ध्यान दिलाया है कि कहीं किसी प्रकार की चूक न हो जाए । भारत के अमर सपूत स्वर्ग में देख रहे हैं कि कितने ऊपर तक भारत पहुँच पाता है । नक्षत्रों में बैठे ये पूर्वज अपने महान कार्यों से देश का नाम ऊँचा कर गये थे । आज वे चाहते हैं कि वर्तमान भारतवासी उनसे भी श्रेष्ठ कार्य करके भारत का गौरव बढ़ाएँ । इस कथन का आशय है कि दिवंगत पूर्वज आज के भारत को ऊँचे से ऊँचे उत्कर्ष पर देखना चाहते हैं । अत : उन्हीं की भावनाओं के अनुरूप संघर्ष को तत्पर रहने की आवश्यकता है । 

प्रश्न 2. 

‘ उपनिवेश के दाग ‘ को कवि ने किसे कहा है ? स्पष्ट कीजिए । 

उत्तर – 

भारतवर्ष एक महान प्राचीन देश है । इसने सदियों की यात्रा की है पर इसमें शिथिलता नहीं आयी है किन्तु इस उपनिवेश पर बँटवारे का दाग लग गया है । भारत । एक विशाल देश था किन्तु स्वतन्त्रता के समय यह भारत एवं पाकिस्तान के रूप में बँट गया । यह विभाजन इस उपनिवेश पर दाग के समान है । जो जोड़ता आया है , उसका टूटना कलंक है । 

प्रश्न 3. 

कवि स्वतन्त्रता को स्थायी रखने के लिए क्या चाहता है ? 

उत्तर – 

भारत की पराधीनता की बेड़ियाँ कट गईं परन्तु उसकी स्वतन्त्रता को स्थायी रखना है । कवि भारतवासियों को उत्साहित करते हुए कहते हैं , जब विशाल साम्राज्य के स्वामी अंग्रेजों को पराजित कर दिया तो अब संसार में किसी से डरने की आवश्यकता नहीं है । इसलिए भारतवासियों में पूर्ण दायित्व का भाव होना चाहिए , उनके हाथों में शस्त्र होने चाहिए तथा आँखों में क्रोध की आग जलनी चाहिए । उसे ललकार तत्पर होने की जरूरत है , चारों ओर उसकी जय जयकार होगी । भारत की आजादी को स्थायी रखने के लिए सभी भारतवासियों को प्राण हथेली पर रखकर तैयार रहना है । 

प्रश्न 4. 

प्रस्तुत कविता का केन्द्रीय भाव स्पष्ट कीजिए । 

उत्तर – 

राष्ट्र प्रेम से परिपूर्ण इस कविता में महान अतीत वाले भारत की स्थिति का वर्णन किया गया है । तीन और सागर से घिरे भारत को आलोकित करने के बाद झूठी हुई सूर्य की किरणें संसार में फैलती हैं । शत्रुओं का विरोध करने तथा स्वतन्त्रता की रक्षा के लिए भारतवासियों को हर प्रकार से तत्पर रहना है । सागर के रल निकालने हैं तो चिन्तन द्वारा संसार का मार्गदर्शन करें । मन में दायित्व का भाव हो तथा भुजाओं में शस्त्र हों तभी चारों ओर विजय पताका फहरेगी । उसके लिए हथेली पर प्राणों को रखकर तैयार रहना है । 

प्रश्न 5. 

‘ तेरे घर पहिले होता विश्व सबेरा ‘ कविता के माध्यम से कवि क्या सन्देश देना चाहता है ? 

उत्तर – 

‘ तेरे घर पहिले होता विश्व सबेरा ‘ कविता राष्ट्रीयता के भाव से परिपूर्ण है । यह एक प्रेरक कविता है । कवि ने इस कविता के माध्यम से भारतवासियों को संघर्ष तथा उत्थान के लिए प्रोत्साहित किया है । भारत ज्ञान – विज्ञान , चिन्तन – दर्शन , संघर्ष – बलिदान , त्याग – तपस्या आदि सभी में अग्रणी रहा है । इसने विश्व को ज्ञान दीप दिखाया है । इसके साथ ही प्राकृतिक दृष्टि से भारत की स्थिति उत्तम है । विश्व में सूर्य की पहली किरण भारत में पड़ती है । इसके बाद झूठी की हुई किरणें शेष संसार में प्रकाश फैलाती हैं । कवि सन्देश देना चाहता है कि जिस प्रकार सूरज की किरणें भारतवर्ष को प्रकाशित करती हैं , उसी प्रकार सभी प्रकार के ज्ञान की प्राप्ति भारत में सबसे पहले हो । सद्गुणों , स्वाभिमान की जागृति भारतीयों में सबसे पहले हो । देश के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर देने का भाव हर भारतीय में भरा रहे । भारत विश्व में सबसे अग्रणी देश हो । 

प्रश्न 6. 

कवि माखनलाल चतुर्वेदी देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए क्या चाहते

उत्तर – 

महान अतीत वाले स्वतन्त्र भारत को आत्मनिर्भर बनाने की इच्छा कवि ने व्यक्त की है । सभी अपने परिश्रम से अपना भाग्य बनाएँ । चिन्तक चिन्तनधारा द्वारा तथा योद्धा अपने शस्त्रों से देश का विकास करें । सभी शत्रुओं की कुचलकर विजय प्राप्त करने का हौसला बुलन्द हो । भारत ने जब ब्रिटिश राज्य के टुकड़े – टुकड़े कर स्वतन्त्रता प्राप्त कर ली है तो अब किसी से भयभीत होने की जरूरत नहीं है । भारत के निवासियों के माथे पर दायित्व की भावना हो । बाँहों में हथियार हों और आँखों में रोष भरा होना चाहिए । तेरे इस उग्र रूप को देखकर शत्रु भाग जाय और चारों ओर तेरी जय – जयकार हो । देश तभी आत्मनिर्भर होगा जब हर व्यक्ति उसके प्रति सब कुछ देने को तत्पर होगा । 

परीक्षोपयोगी अति लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. 

बलखाते विजयी भारतवर्ष से क्या आशय है ? 

उत्तर – 

भारतवर्ष ने युद्धों में सदैव अपना बल प्रदर्शन कर विजय प्राप्त की है । इसी भाव को व्यक्त करने के लिए ‘ बलखाते विजयी भारतवर्ष ‘ कहा गया है । 

प्रश्न 2.

‘ओ पूरब के प्रलयी पंथी ‘ किसके लिए आया है ? 

उत्तर – 

भारतवर्ष पूर्व में स्थित है । यह संसार में प्रलय मचा देने वाला देश है । इसी को सम्बोधित करते हुए ‘ ओ पूरब के प्रलयी पंथी ‘ कहा गया है ।

प्रश्न 3. 

सभी दिशाओं में किसकी जय – जयकार है ? 

उत्तर – 

दायित्व बोध से युक्त शक्तिशाली भारतवर्ष की पूर्व , पश्चिम , उत्तर और दक्षिण सभी दिशाओं में जय – जयकार हो रही है । यही संसार का सिरमौर है ।

तेरे घर पहिले होता विश्व सबेरा पाठ का सारांश

राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत इस कविता में माखनलाल चतुर्वेदी ने विश्व के अग्रणी देश भारत के सपूतों को प्रेरणा दी है । सदियों की लम्बी यात्रा करने वाले भारत पर किसी प्रकार की कोई शिथिलता नहीं आ पायी है । स्वर्णिम अतीत वाले भारत के सपूतो जाग्रत होकर प्रलयंकारी हुँकार भर विरोधियों पर आक्रमण करने को तैयार रहो । प्राकृतिक दृष्टि से विशिष्ट तेरे ( भारत के ) तीन ओर सागर है , सूर्य की किरणें सबसे पहले यहाँ पड़ती हैं । यह देश हर काम में सबसे अग्रणी रहता है । यहाँ के मल्लाह सागर से रत्न निकालते हैं । अपने चिन्तन से विश्व को मार्ग दिखाने वाले भारतीय योद्धा अपनी प्रत्यंचा तान कर तत्पर हो जा और प्रबलतम शत्रु पर विजय प्राप्त कर । जब ब्रिटिश राज्य के टुकड़े कर दिए तो सभी दिशाओं में तेरी जयकार होगी । सभी भारतवासी अपने प्राण हथेली पर रखकर संघर्ष को हरपल तत्पर हैं ।

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