MP Board Class 10th Special Hindi Sahayak Vachan Solutions Chapter 5 भगिनी निवेदिता

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MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions Chapter 5 भगिनी निवेदिता (संस्मरण, प्रवाजिका आत्मप्राणा)

भगिनी निवेदिता अभ्यास 

 

प्रश्न 1. 

स्वामी विवेकानन्द से निवेदिता की मुलाकात कब , कहाँ और कैसे हुई ?

उत्तर – 

स्वामी विवेकानन्द सन् 1893 के शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में ख्याति प्राप्त कर चुके थे । वे अपने कुछ मित्रों के आग्रह पर इंग्लैण्ड आये थे । स्वामी जी से मार्गरेट की पहली भेंट वहीं हुई । मार्गरेट ने स्वामी जी के कई प्रवचन सुने । उनसे वाद – विवाद , तर्क – वितर्क किया , स्वयं को पूरी तरह संतुष्ट पाने के पश्चात् उन्होंने स्वामी विवेकानन्द को अपना आदर्श बनाया । स्वामी जी के आह्वान पर मारिट ने भारत आने का निश्चय किया ।।

प्रश्न 2. 

स्वामी जी के साथ हिमालय यात्रा में निवेदिता को क्या अनुभव हुए ? 

उत्तर – 

निवेदिता स्वामी विवेकानन्द के साथ हिमालय की पैदल यात्रा करने निकल पड़ीं । वे पटना , वाराणसी , लखनऊ , रावलपिंडी , बारामूला होते हुए कश्मीर पहुँचे । उन्हें पहली बार भारत के तीर्थ , नदियों , पर्वतों , ग्रामीण जीवन तथा धर्मशील श्रद्धावान भारतीयों से मिलने , उन्हें समझने का अवसर प्राप्त हुआ । स्वामी जी उनको भारत के इतिहास , भूगोल , स्थानीय विशेषताओं , धर्म – दर्शन आदि की जानकारी देते रहते थे । अमरनाथ की कठिन यात्रा उन्होंने स्वामी जी के साथ की । इस यात्रा से उनका जीवन ही बदल गया । वहाँ पर उनकी विभिन्न सम्प्रदायों के साधु – सन्तों से भेंट हुई । इससे उनको धर्म को समझने में बहुत सहायता मिली । 

प्रश्न 3. 

अमरनाथ यात्रा से भगिनी निवेदिता को भारत को समझने में किस तरह सहायता मिली ? 

उत्तर – 

जब भगिनी निवेदिता स्वामी विवेकानन्द के साथ हिमालय यात्रा पर पैदल गईं तो उन्हें अमरनाथ यात्रा का भी अवसर मिला । मार्ग में उन्हें उत्तर प्रदेश , पंजाब एवं जम्मू – कश्मीर के लोगों से मिलने तथा उनको समझने के अवसर मिले । अमरनाथ यात्रा से उन्हें बहुत अधिक लाभ मिला । वहाँ विभिन्न सम्प्रदायों के अनेक साधु – सन्तों से मिलने का अवसर मिला । उन्होंने धर्म – दर्शन आदि पर उनसे चर्चा की । उन्हें भारतीय चिन्तन , आध्यात्म , जीवन – शैली आदि को समझने में उनसे बहुत सहायता प्राप्त हुई । भारत की धार्मिक , दार्शनिक विविधता के मर्म को उन्होंने समझा तथा यहाँ की मानवता के प्रति समर्पित दृष्टि को समझा । इस प्रकार अमरनाथ यात्रा से निवेदिता को भारत के बारे में जानने में बड़ी सहायता मिली ।

प्रश्न 4. 

कलकत्ता ( कोलकाता ) में फैले प्लेग के समय निवेदिता ने किस प्रकार सेवा की ?

उत्तर – 

भगिनी निवेदिता ने कलकत्ता ( कोलकाता ) में लड़कियों के लिए एक स्कूल खोल दिया । वहाँ वे पढ़ार्ती तथा विभिन्न प्रकार के काम लड़कियों को सिखाती थीं । तभी कलकत्ता ( कोलकाता ) में भयंकर प्लेग फैल गया । स्वामी विवेकानन्द ने अपने सभी शिष्यों को सेवा कार्य में लगा दिया । निवेदिता ने प्लेग में सहायता के लिए युवाओं की एक टोली तैयार की । यह टोली भूख – प्यास की चिन्ता किए बिना दिन – रात सेवा कार्य करती थी । इस समर्पित सेवा से निवेदिता को लोगों का अपार स्नेह , प्यार तथा आदर मिला । चिकित्सा अधिकारियों ने उनकी प्रशंसा में लिखा कि ‘ निवेदिता अपने आराम , स्वास्थ्य , भोजन तक की चिन्ता न कर गन्दी बस्तियों में घूमती रहीं । ‘ यह सब उनकी निःस्वार्थ मानव सेवा का ही फल था । 

प्रश्न 5. 

स्त्री शिक्षा पर निवेदिता का विचार स्पष्ट कीजिए । 

उत्तर – 

भगिनी निवेदिता भारत की नारी के गुणों से बहुत प्रभावित थीं । वे उन्हें शिक्षित करना तथा आत्मनिर्भर बनाना चाहती थीं । इसलिए उन्होंने अपने निवास के पास लड़कियों लिए स्कूल खोला । उसमें वे पढ़ाती तथा लड़कियों को मिट्टी का काम , चित्रकारी आदि सिखाती थीं । इस विद्यालय के लिए धन एकत्र करने वे इंग्लैण्ड , अमेरिका , फ्रांस आदि देशों में गई । प्रारम्भ में इस विद्यालय में कम बच्चे थे , परन्तु धीरे – धीरे निवेदिता का भाव बढ़ा और विद्यालय विकसित होने लगा । आज वह रामकृष्ण शारदा मिशन भगिनी निवेदिता बालिका विद्यालय ‘ के रूप में स्त्री शिक्षा का अनुकरणीय कार्य कर रहा है । स्पष्ट है कि निवेदिता स्त्री शिक्षा के प्रति सजग थीं । वे भारतीय नारी को सभी गुणों के साथ शिक्षित भी देखना चाहती थीं । पश्चिम का अंधानुकरण उन्हें स्वीकार न था ।

प्रश्न 6. 

भारतीय स्त्रियों के कौन – कौन से गुणों ने निवेदिता को प्रभावित किया ?

उत्तर – 

भगिनी निवेदिता पर भारतीय स्त्रियों के विभिन्न गुणों का गहरा प्रभाव था । उनके लज्जालु , विनम्र , सच्चरित्र , सेवा भावी , निष्ठावान एवं स्वाभिमानी स्वभाव में उन्हें सच्चे मानव का स्वरूप दिखाई देता था । वे इन गुणों में शिक्षा और जोड़ना चाहती थीं । उन्हें पश्चिम का अन्धानुकरण और कथित आधुनिकता स्वीकार नहीं थी क्योंकि इससे भारतीय नारी के मूल गुण ही नष्ट हो जाते हैं । भारतीय नारी की स्वाभाविक विनम्रता , सामूहिक गृहस्थ जीवन का संचालन एवं सरलता उन्हें प्रभावित करती थीं । पत्नी पवित्रता , पतिव्रता धर्म , माँ की नि : स्वार्थ ममता एवं सहज वात्सल्य भाव से परिपूर्ण भारतीय नारी की वे भूरि – भूरि प्रशंसा करती थीं । वे लक्ष्मीबाई और अहिल्याबाई के वीरतापूर्ण कार्यों से प्रेरणा लेने की बात कहती थीं । उनका पक्का विश्वास था कि भारत की स्त्री जाति जाग्रत हो जाए तो देश फिर से महान हो जायेगा । इस प्रकार निवेदिता भारतीय स्त्री के विभिन्न गुणों से बहुत प्रभावित थीं ।

परीक्षोपयोगी अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. 

भगिनी निवेदिता का जन्म कहाँ हुआ था ? उनके माता – पिता का क्या नाम था ?

उत्तर – 

भगिनी निवेदिता का जन्म आयरलैण्ड में 28 अक्टूबर , 1867 को हुआ था । उनकी माँ का नाम इजाबेल हेमिल्टन तथा पिता का नाम सोमुएल रिचमण्ड था । 

प्रश्न 2. 

निवेदिता ने अपने गुरु विवेकानन्द के साथ कहाँ की पैदल यात्रा कर भारत को देखा – समझा ? 

उत्तर – 

निवेदिता अपने गुरु स्वामी विवेकानन्द के साथ हिमालय की पैदल यात्रा पर निकलीं । वे पटना , वाराणसी , लखनऊ , पंजाब – रावलपिण्डी , बारामूला होते हुए कश्मीर पहुँचे । इस यात्रा में ही उन्हें भारत के तीर्थ , नदियों , धर्म , इतिहास – भूगोल आदि के विषय में देखने – समझने का अवसर मिला । 

प्रश्न 3. 

भारत की स्त्रियों के बारे में भगिनी निवेदिता का क्या भाव था । 

उत्तर – 

भगिनी निवेदिता भारतीय स्त्रियों की सरलता , पवित्रता , निष्ठा एवं सच्चाई से अत्यधिक प्रभावित थीं । वे उन्हें शिक्षित करना चाहती थीं । वे भारत को महान महिलाओं का देश कहती थीं ।

भगिनी निवेदिता पाठ का सारांश 

रामकृष्ण मिशन की प्रवाजिका आत्मप्राणा ने इस पाठ में भगिनी निवेदिता के जीवन , कार्य एवं भारत के लिए उनके समर्पण को सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया है । यह भारतवर्ष के प्रति उनकी समर्पण भावना ही थी जिसके कारण आयरलैण्ड की मार्गरेट एलिजाबेथ नोबुल ‘ भगिनी निवेदिता ‘ बन गईं । स्वामी विवेकानन्द की इस शिष्या ने लड़कियों के लिए स्कूल खोला । उन्होंने कलकत्ता ( कोलकाता ) में प्लेग का प्रकोप होने पर रात – दिन , भूख – प्यास की चिन्ता छोड़ रोगियों की सेवा की और शहर की सफाई में बढ़ – चढ़कर योगदान दिया । वे भारतीय महिला के पवित्रता , पतिव्रता धर्म , माता की नि : स्वार्थ ममता और उसके वात्सल्य जैसे गुणों की प्रशंसक र्थी । विदेशों में निवेदिता ने भारतीय नारी के इन गुणों को प्रस्तुत कर उसकी छवि को सुधारा । निवेदिता ने भारत की राजनैतिक स्वतन्त्रता के राष्ट्रीय आन्दोलन में भाग लिया । वे सभी समस्याओं , यहाँ तक कि देश की स्वतन्त्रता का हल भारत की एकता में ही देखती थीं । अपने समय के प्रसिद्ध राजनैतिक , सामाजिक , धार्मिक लोगों एवं कलाकारों से उनका घनिष्ठ परिचय था । अवकाश के दिन प्राय : वे जगदीशचन्द्र बसु के यहाँ चली जाती । सन् 1911 में बोस परिवार के साथ वे दार्जिलिंग गयीं और 13 अक्टूबर को प्रातः भारतमाता की इस पुत्री ने वहाँ अपने प्राणों का त्याग कर दिया ।

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