MP Board Class 10th Special Hindi Sahayak Vachan Solutions Chapter 7 यक्ष प्रश्न

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MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions Chapter 7 यक्ष प्रश्न (वार्ता, संकलित)

यक्ष प्रश्न अभ्यास

 

प्रश्न 1. 

विषैले तालाब के नजदीक युधिष्ठिर ने क्या देखा ? 

उत्तर – 

अपने चारों भाइयों के न लौटने पर जब युधिष्ठिर उस दिशा में चले , जिधर वे गये थे । उन्हें एक विषैला तालाब दिखाई दिया । उस तालाब के पास पहुँचने पर उन्होंने देखा उनके चारों भाई भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव मृत – से पड़े हुए हैं । यह देखते ही युधिष्ठिर चौंक पड़े और व्याकुल हो उठे । उनकी आँखों से अश्रुधारा बहने लगी । उन्होंने अपने भाइयों के शरीर को ध्यान से देखा तो उन्हें कुछ माया जाल – सा प्रतीत हुआ । आस – पास की जमीन पर किसी शत्रु के पैरों के निशान वहाँ न थे । उन्हें लगा कि कहीं दुर्योधन ने ही कोई षड्यंत्र न रच डाला हो । 

प्रश्न 2. 

यक्ष के संसार के सबसे बड़े आश्चर्य सम्बन्धी प्रश्न पर युधिष्ठिर ने क्या उत्तर दिया ? 

उत्तर – 

युधिष्ठिर अपने मृत – से भाइयों को देखकर व्याकुल होते हुए पानी पीने की इच्छा से तालाब में उतरे तो यक्ष ने रोकते हुए उनसे प्रश्न किये । उनमें एक प्रश्न था- ” संसार में सबसे बड़े आश्चर्य की बात क्या है ? ” यह सुनकर युधिष्ठिर ने उत्तर दिया कि ” हर रोज आँखों के सामने कितने ही प्राणियों को मृत्यु के मुँह में जाते देखकर भी बचे हुए प्राणी , जो यह चाहते हैं कि हम अमर रहें , यह महान आश्चर्य की बात है । ” यह उत्तर सुनकर यक्ष प्रसन्न हुआ । 

प्रश्न 3. 

युधिष्ठिर ने नकुल को जीवित कराने का निश्चय क्यों किया ? 

उत्तर – 

यक्ष अपने प्रश्नों के सही उत्तर पाकर बड़ा प्रसन्न हुआ । उसने युधिष्ठिर से कहा कि राजन् मैं तुम्हारे मृत भाइयों में से एक को जीवित कर सकता हूँ । तुम जिस किसी को भी चाहो , वह जीवित हो जाएगा । युधिष्ठिर ने उत्तर दिया कि ‘ मेरा छोटा भाई नकुल जीवित हो उठे । ‘ यह सुनकर यक्ष प्रकट हुआ और पूछा कि ‘ युधिष्ठिर दस हजार हाथियों के बल वाले भीमसेन को छोड़कर नकुल को जीवित कराना क्यों ठीक समझा ? ‘ युधिष्ठिर ने उत्तर दिया कि ‘ यक्षराज मेरे पिता की दो पत्तियाँ हैं । एक माँ का.पुत्र तो मैं बचा हूँ । मैं चाहता हूँ कि एक पुत्र माता माद्री का भी जीवित हो उठे जिससे हिसाब बराबर हो जाए । ‘ पक्षपात से रहित युधिष्ठिर के उत्तर से यक्ष प्रसन्न हो उठे और उन्होंने चारों को जिन्दा करने का वर दिया । 

प्रश्न 4. 

यक्ष ने आशीर्वाद देते हुए युधिष्ठिर से क्या कहा ?

उत्तर – 

युधिष्ठिर ने यक्ष के सभी प्रश्नों के सही उत्तर दिये । अन्त में एक भाई के जीवित होने का वर दिया तो युधिष्ठिर ने अपनी दूसरी माँ के बेटे नकुल को जीवित कराना चाहा । इस निष्पक्षता पर यक्ष बहुत प्रसन्न हुआ और उन्होंने चारों भाइयों के जीवित हो उठने का वर दिया । युधिष्ठिर के सद्गुणों पर मुग्ध होकर उन्होंने आशीर्वाद देते हुए कहा ‘ बारह वर्ष के वनवास की अवधि पूरी होने में अब थोड़े ही दिन बाकी रह गये हैं । बारह मास तक तो तुम्हें अज्ञातवास करना है , वह भी सफलता से पूरा हो जायेगा । तुम्हें और तुम्हारे भाइयों को कोई भी नहीं पहचान सकेगा । तुम अपनी प्रतिज्ञा सफलता से पूरी करोगे । 

प्रश्न 5. 

वनवास की कठिनाइयों के बीच अर्जुन , भीम और युधिष्ठिर ने क्या – क्या प्राप्त किया ? 

उत्तर – 

वनवास की विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों को पाण्डवों ने साहसपूर्वक सहन किया । इसी बीच अर्जुन इन्द्रदेव से दिव्यास्त्र प्राप्त करके लौट आये । भीमसेन ने भी सुगन्धित फूलों वाले सरोवर के निकट महाबली हनुमान से भेंट कर ली । वे उनका आलिंगन पाकर दस हजार गुना अधिक बलवान हो गये । युधिष्ठिर ने मायावी सरोवर के निकट स्वयं श्री धर्मदेव दर्शन किये और उनसे गले मिलने का सौभाग्य प्राप्त कर लिया । इस प्रकार अर्जुन , भीम और युधिष्ठिर ने वनवास की कठिनाइयों में महान उपलब्धियाँ अर्जित की । 

प्रश्न 6. 

युधिष्ठिर द्वारा दिये गये उत्तरों की यक्ष पर क्या प्रतिक्रिया हुई ? 

उत्तर – 

जब युधिष्ठिर अपने भाइयों को खोजते हुए विषैले तालाब पर आये तो उन्होंने जल पीना चाहा परन्तु यक्ष ने उनसे अपने प्रश्नों के उत्तर देने की शर्त लगा दी । युधिष्ठिर ने उनके सभी प्रश्नों के सही उत्तर दिये । इससे यक्ष प्रसन्न हो उठे और उन्हें एक भाई को जीवित करने का वर दिया । जब युधिष्ठिर ने नकुल को जीवित करने की बात कही तथा स्पष्टीकरण दिया कि हमारे पिता की दो पलियाँ हैं , एक का पुत्र तो मैं जीवित हूँ , दूसरी का पुत्र नकुल जीवित हो उठे तो ठीक होगा । यह जानकर यक्ष युधिष्ठिर की निष्पक्षता पर मुग्ध हो उठा और उनके चारों भाइयों को जीवित होने का वर दिया । यक्ष ने युधिष्ठिर को सकुशल वनवास व्यतीत करने का आशीर्वाद भी दिया । 

प्रश्न 7. 

‘ यक्ष – युधिष्ठिर ‘ संवाद से आपको क्या शिक्षा मिलती है ? 

उत्तर – 

‘ यक्ष – युधिष्ठिर ‘ संवाद में मानवीय गुणों – अवगुणों का निर्धारण किया गया है । उसमें माता – पिता , सत्संगति के महत्त्व को रेखांकित किया गया है । श्रेष्ठ मानव बनने का मार्गदर्शन भी इस संवाद से मिलता है । इस संवाद के प्रश्न साधारण से लगते हैं किन्तु बड़े गम्भीर तथा कठिन हैं । इन प्रश्नों के उत्तर हमारा मार्गदर्शन करते हैं कि हमें जीवन सफल बनाने के लिए क्या – क्या करना चाहिए और किसका त्याग करना चाहिए । सत्संगति , धैर्य , विद्या , दान , सच्चरित्र , निष्पक्षता को धारण कर जीवन को उन्नयन की ओर ले जाना चाहिए । मन की चंचलता , चिन्ता , अहं भाव , क्रोध , लालच आदि पतन की ओर ले जाने वाले विकारों से छुटकारा पाना चाहिए । माता – पिता , मातृभूमि , पत्नी आदि के प्रति समर्पण का भाव होना चाहिए । इस प्रकार यह संवाद हमें जीवन पथ को सरल बनाने की महान शिक्षा देता है । 

परीक्षोपयोगी अति लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. 

युधिष्ठिर के चारों भाई मृत अवस्था में कहाँ पड़े थे ? 

उत्तर – 

जब चारों भाई लौटकर नहीं आये तब युधिष्ठिर उन्हें खोजने निकल पड़े । उन्होंने विषैले तालाब के पास जाकर देखा कि उनके चारों भाई मृत अवस्था में पड़े थे । 

प्रश्न 2. 

कौन से शास्त्र का अध्ययन करके मनुष्य बुद्धिमान बनता है ? 

उत्तर – 

मनुष्य महान लोगों की संगति में रहकर ही बुद्धिमान बनता है । इसके अतिरिक्त कोई ऐसा शास्त्र नहीं है जिसका अध्ययन करके मनुष्य बुद्धिमान बन सके । प्रश्न 3. युधिष्ठिर के उत्तरों से प्रसन्न होकर यक्ष ने क्या कहा ? उत्तर – यक्ष अपने सभी प्रश्नों के ठीक – ठीक उत्तर सुनकर युधिष्ठिर से बोला कि तुम अपने चार भाइयों में से किसी एक को जीवित करा सकते हो । मैं तुम्हारे द्वारा बताये गये एक भाई को जीवित कर दूंगा ।

यक्ष प्रश्न पाठ का सारांश 

महाभारत ग्रन्थ से संकलित इस पाठ में यक्ष और युधिष्ठिर के प्रश्नोत्तर के रूप में मानव जीवन में विभिन्न गुणों और अवगुणों का स्थान निर्धारित किया गया है । साथ ही इसमें माता – पिता के महत्व को भी प्रतिष्ठापित किया गया है । धैर्य , महान लोगों की संगति , विद्या , दान , शील और सच्चरित्र जैसे सद्गुणों को ग्रहण करने और अहंकार , क्रोध और लालच जैसी दुष्प्रवृत्तियों का त्याग करने की प्रेरणा ‘ यक्ष प्रश्न ‘ नामक पाठ से मिलती है । पानी पीने की इच्छा से आये अपने चारों भाइयों को मृत देख युधिष्ठिर दुःखी होते हैं । सोचते हुए प्यास से व्याकुल हो तालाब की ओर जाते हैं । उन्हें प्रश्न पूछने की यक्ष की एक वाणी सुनाई देती है । वे प्रश्नों के ठीक उत्तर देते हैं । यक्ष प्रसन्न होकर एक भाई को जिन्दा करने का वचन देता है । युधिष्ठिर नकुल को जीवित चाहते हैं , क्योंकि वह उनकी दूसरी माँ माद्री का पुत्र है । यक्ष युधिष्ठिर के पक्षपात रहित स्वभाव पर प्रसन्न होकर चारों भाइयों को जिन्दा होने का आशीष देता है । वह उन्हें अज्ञातवास में सुखी एवं सफल रहने का भी आशीर्वाद देता है । सभी पाण्डव मत्स्य देश में एक वर्ष व्यतीत करने का निश्चय करते हैं ।

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