MP Board Class 10th Special Hindi Sahayak Vachan Solutions Chapter 8 बेटियाँ पावन दुआएँ हैं

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MP Board Class 10th Hindi Navneet Solutions Chapter 8 बेटियाँ पावन दुआएँ हैं कविता, अजहर हाशमी)

बेटियाँ पावन दुआएँ हैं अभ्यास

 

प्रश्न 1. 

कवि अजहर हाशमी ने बेटियों को गौरव – कथाएँ क्यों कहा है ? स्पष्ट कीजिए । 

उत्तर – 

बेटियों में त्याग , तप , गुण , धर्म , साहस के भाव अपार मात्रा में होते हैं । वे निरन्तर देती हैं , लेती कुछ नहीं हैं । वे कुछ चाहती नहीं हैं , शान्त भाव से अपने दायित्व का निर्वाह निष्टा के साथ करती रहती हैं । वे धर्म की साकार प्रतिमा होती हैं । नीति संगत ही उन्हें स्वीकार होता है । उनमें आत्मविश्वास तथा साहस भरा होता है । इतिहास में उनके त्याग , तप , साहस , धैर्य आदि की अनेक गाथाएँ विद्यमान हैं । लक्ष्मीबाई , अहिल्याबाई , भगिनी निवेदिता , सरोजिनी नायडू , द्रौपदी , मदर टेरेसा आदि कितनी ही बेटियों ने देश का गौरव बढ़ाया है । 

प्रश्न 2. 

‘ जीवन में बेटियों का महत्व ‘ विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए । 

उत्तर – 

सृष्टि की मूलाधार नारी की जीवन में महिमा है । ईश्वर के पश्चात् इस संसार में मनुष्य लाने का श्रेय नारी को है । वही पाल – पोसकर बड़ा करती है । उसके बेटी , बहिन , पत्नी और माँ रूप हैं । प्रत्येक रूप में वह चाहती कुछ नहीं है , देती ही देती है । वह विनम्रतापूर्वक बिना किसी लालच के अपने दायित्व का निर्वाह करती है । बेटी रूप में सेवा – चाकरी , माँ के रूप में ममता , बहिन के रूप में सहायता , आज्ञापालन तथा पत्नी के रूप में घर गृहस्थी का संचालन सब कुछ उसी पर तो निर्भर रहता है । उस प्रकार बेटियों का जीवन में विशेष महत्व है । 

प्रश्न 3. 

आज के बच्चे कल के नागरिक हैं ‘ इस विषय पर दस पंक्तियाँ लिखिए । 

उत्तर – 

संसार में मानव निरन्तर गतिशील रहता है । आज जो देश के कर्णधार , विचारक , सेनानी हैं , वे दिवंगत होते हैं और उनके स्थान पर नये कर्णधार भार सँभालते हैं । यह क्रम निरन्तर चलता रहता है । जो आज शिशु है , वह बढ़कर कल बालक , फिर किशोर और युवा बनकर देश का नागरिक कहलायेगा । क्योंकि बच्चा ही भविष्य का कर्णधार है , अत : उसके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होना आवश्यक है । स्वास्थ्य , विवेक , सूझ – बूझ , दूरदृष्टि , सहृदयता आदि का होना उसमें आवश्यक है । नागरिक होने पर उसके कंधों पर घर – परिवार का भार होगा । समाज तथा जाति के प्रति भी उसे अपने धर्म का पालन करना होगा । मातृभूमि जिसका अन्न खाकर वह बड़ा हुआ है , उसकी सेवा उसे करनी होगी । सच्चा नागरिक वही है जो क्षेत्र में अपनी पहचान बना सके । अत : आज के बच्चे को अपने व्यक्तित्व का चहुंमुखी विकास कर स्वयं को श्रेष्ठ नागरिक सिद्ध करना चाहिए । 

प्रश्न 4. 

बेटियाँ पावन दुआएँ ‘ कविता का केन्द्रीय भाव स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर – 

‘ बेटियाँ पावन दुआएँ हैं ‘ कविता में अजहर हाशमी ने बेटियों के सद्गुणों , उनके कोमल स्वभाव , सहन शक्ति , विनम्रता , दायित्व भावना आदि का बड़ा ही मार्मिक अंकन किया है । वे सृष्टि का मूलाधार हैं । उनमें त्याग , तप , धर्म , साहस , धैर्य , सहनशीलता , सहानुभूति आदि भाव कूट – कूट कर भरे हैं । वास्तव में बेटियाँ पावन दुआएँ ही हैं । व्यथाएँ , सुरभित फिजाएँ , संवेदनाएँ आदि सब कुछ हैं ।

परीक्षोपयोगी अति लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. 

बेटियाँ गुरुग्रन्थ वाणी तथा वैदिक ऋचाएँ हैं ? कैसे ? 

उत्तर – 

गुरुग्रन्थ वाणी तथा वैदिक ऋचाओं में मानव के लिए जो सदोपदेश दिए गये हैं , बेटियाँ अपने जीवन में उन्हें साक्षात् रूप में प्रस्तुत करके मनुष्य को सद्मार्ग की ओर प्रेरित करती है ।

प्रश्न 2. 

कवि ने बेटियों को हर्षित व्यथाएँ क्यों कहा है ? 

उत्तर – 

बेटियों में अद्भुत सहन शक्ति होती है । वे बड़ी से बड़ी पीड़ा को हँसते जाती हैं । आशय यह है कि बड़े से कष्ट को सहकर भी वे मुस्कराती रहती हैं । 

प्रश्न 3. 

बेटियाँ संवेदनाएँ किसलिए हैं ? 

उत्तर – 

सहनशीलता , धैर्य , साहस , सहानुभूति आदि भावों से युक्त बेटियाँ बुरे से बुरे दिनों में भी धीरज नहीं छोड़ती हैं । सहानुभूति तथा सहयोग भाव के द्वारा वे बुरे दिनों में भी प्रेरक बनती “

बेटियाँ पावन दुआएँ हैं पाठ का सारांश 

‘ बेटियाँ पावन दुआएँ हैं ‘ कविता में अजहर हाशमी ने बेटियों के सद्गुणों , उनके कोमल स्वभाव , सहन शक्ति , विनम्रता , दायित्व भावना आदि का बड़ा ही मार्मिक अंकन किया है । वे सृष्टि का मूलाधार हैं । उनमें त्याग , तप , धर्म , साहस , धैर्य , सहनशीलता , सहानुभूति आदि भाव कूट – कूट कर भरे हैं । वास्तव में बेटियाँ पावन दुआएँ ही हैं । व्यथाएँ , सुरभित फिजाएँ , संवेदनाएँ आदि सब कुछ हैं ।

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